हरमहेंद्र सिंह बेदी के काव्य में समाज

Authors

  • रजनी वालिया Author
  • डॉ. अरविंदर कौर चुंबर Author

Keywords:

समाज, स्त्री, सामाजिक चेतना, आर्थिक असमानता, राजनैतिक जागरूकता, सांस्कृतिक पहचान, भाषा, स्वतंत्रता, न्याय, संघर्ष, परिवर्तन

Abstract

यह शोधपत्र प्रसिद्ध हिन्दी कवि हरमहेंद्र सिंह बेदी के काव्य में समाज की अभिव्यक्ति और उसकी विविध सामाजिक परतों के चित्रण का विश्लेषण करता है। बेदी का काव्य केवल भावनात्मक या सौंदर्यात्मक नहीं है, बल्कि उसमें सामाजिक यथार्थ, अन्याय के प्रति प्रतिरोध, वंचित वर्गों की आवाज़, स्त्री चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता जैसे विषयों का सशक्त चित्रण मिलता है। वे कविता को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानते हैं। प्रस्तुत शोध के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि हरमहेंद्र सिंह बेदी की कविताएँ भारतीय समाज की जटिलताओं को उजागर करती हैं और एक जागरूक साहित्यिक हस्तक्षेप के रूप में उभरती हैं।

Author Biographies

  • रजनी वालिया

    शोधार्थिनी, हिंदी विभाग, देश भगत विश्वविद्यालय,  मंडी गोबिंदगढ़, पंजाब

     

  • डॉ. अरविंदर कौर चुंबर

    सह - प्राध्यापक, हिंदी विभाग, देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोबिंदगढ़, पंजाब

     

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Published

2025-06-12

How to Cite

हरमहेंद्र सिंह बेदी के काव्य में समाज. (2025). शब्दसागर, 2(3), 1-13. https://shabdasagar.in/index.php/journal/article/view/15

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