हरमहेंद्र सिंह बेदी के काव्य में समाज
Keywords:
समाज, स्त्री, सामाजिक चेतना, आर्थिक असमानता, राजनैतिक जागरूकता, सांस्कृतिक पहचान, भाषा, स्वतंत्रता, न्याय, संघर्ष, परिवर्तनAbstract
यह शोधपत्र प्रसिद्ध हिन्दी कवि हरमहेंद्र सिंह बेदी के काव्य में समाज की अभिव्यक्ति और उसकी विविध सामाजिक परतों के चित्रण का विश्लेषण करता है। बेदी का काव्य केवल भावनात्मक या सौंदर्यात्मक नहीं है, बल्कि उसमें सामाजिक यथार्थ, अन्याय के प्रति प्रतिरोध, वंचित वर्गों की आवाज़, स्त्री चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता जैसे विषयों का सशक्त चित्रण मिलता है। वे कविता को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानते हैं। प्रस्तुत शोध के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि हरमहेंद्र सिंह बेदी की कविताएँ भारतीय समाज की जटिलताओं को उजागर करती हैं और एक जागरूक साहित्यिक हस्तक्षेप के रूप में उभरती हैं।











