संस्कार और संस्कृति: समाजशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

संस्कार, संस्कृति, समाजशास्त्र, परिप्रेक्ष्य

Abstract

संस्कार और संस्कृति किसी भी समाज के आधारभूत तत्व होते हैं, जो उस समाज की पहचान, उसकी मूल्यों की संरचना, और उसके व्यवहार को निर्धारित करते हैं। यह शोधपत्र समाजशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में संस्कार और संस्कृति का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें संस्कारों की उत्पत्ति, उनका विकास, और उनके समाज पर प्रभाव का अध्ययन किया गया है। साथ ही, संस्कृति की विभिन्न परतों का विश्लेषण कर उसके समाजशास्त्रीय महत्व को समझने का प्रयास किया गया है। यह अध्ययन भारतीय संदर्भ में संस्कार और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को भी उजागर करता है। संस्कार और संस्कृति एक समाज की नींव होते हैं, जो व्यक्तियों के जीवन में गहरे प्रभाव डालते हैं। संस्कार जीवन के उन अनुष्ठानों और नियमों का समूह है जो एक व्यक्ति को समाज का आदर्श सदस्य बनने के लिए प्रेरित करता है, जबकि संस्कृति उस समाज की जीवन शैली, परंपराओं, और मान्यताओं का प्रतीक होती है। इस शोध पत्र में, संस्कार और संस्कृति के बीच के संबंधों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें दोनों की भूमिका, परस्पर प्रभाव, और एक समाज में उनके महत्त्व पर चर्चा की गई है। साथ ही, संस्कार और संस्कृति कैसे एक-दूसरे को पोषित करते हैं, इस पर भी गहन विचार किया गया है।

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    सम्पादक, शोध प्रकाशन, हिसार, हरियाणा

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Published

2023-11-27

How to Cite

संस्कार और संस्कृति: समाजशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन. (2023). शब्दसागर, 1(1), 17-25. https://shabdasagar.in/index.php/journal/article/view/5

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